ऑटिज्म क्या है?

 30 MARCH 2016  Dr. Priyanka Kalra
ऑटिज्म क्या है?

ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास में बाधा डालने वाला विकार होता है।ऑटिज़्म को कई नामों से जाना जाता है जैसे स्‍वलीनता, मानसिक रोग, स्वपरायणता। ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति बाहरी दुनिया से अनजान अपनी ही दुनिया में खोया रहता है।ऑटिज्म एक सामान्य शब्द है जिसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार ( एएसडी) के रूप में विकारों के एक समूह का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिसमे आटिज्म, परवेसिव डेवलपमेंटल डिसऑर्डर एवं एसपर्जर भी शामिल हैं

ऑटिज्म के साथ लोगों को इन क्षेत्रों में कठिनाई होती है :

  1. सामाजिक संपर्क और भाषा को सामाजिक संचार के लिए इस्तेमाल के रूप में
  2. दोहराव हितों या व्यवहार
ऑटिज्म का कारण क्या है ?

ऑटिज्म का सही कारण ज्ञात नहीं है । कुछ बच्चों को फ्रेजेल एक्स सिंड्रोम, तुबेरौस स्क्लेरोसिस एवं अंगेलमेन सिंड्रोम के रूप में एक आनुवांशिक विकार के रूप में ऑटिज्म होता है | गर्भावस्था के दौरान कुछ बीमारियों या रसायनों के संपर्क में होना से भी ऑटिज्म को जोड़ा गया है | वैज्ञानिकों को लगता है कि कई कारण हो सकते हैं दिमाग की गतिविधियों में असामान्यता या जन्म‍ संबंधी दोष होना भी ऑटिज्म के कारण कारण हो सकते हैं |

ऑटिज्म कितना आम है ?

अमरीकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने हाल ही में 68 में 1 बच्चे को होने की सूचना दी है | ऑटिज्म के प्रसार में वृद्धि हुई है । यह बहस हो रही है कि क्या ऑटिज्म में जो वृद्धि आई है , क्या वह सच में वृद्धि की वजह से है या ऑटिज्म में जागरूकता में वृद्धि की वजह से | परन्तु यह गौर करने की बात है कि ऑटिज्म प्रभावित रोगियों में डाउन सिंड्रोम की संख्या अपेक्षा से भी अधिक है।

ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं ?

· किसी दूसरे व्यक्ति की आंखों में आंखे डालकर बात करने से घबराना

· छह महीने की उम्र तक या बाद में कोई मुस्कान या अन्य हर्षित भाव ना होना

· नौ महीने की उम्र तक आवाज़ें निकाल कर खिलाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देना

· बच्चा बारह महीने की उम्र तक भी बड़बड़ाता/ आवाज़े निकालते/तुत्लाता नहीं है

· बारह महीने की उम्र तक ऊँगली से या अन्य किसी तरीके से इशारे नहीं करना

· सोलह महीने तक एक भी शब्द नहीं बोलना

· दो शब्दों को जोड़ कर दो वर्ष की आयु तक भी नहीं बोलना

· बहुत अधिक बेचैन होना, बहुत अधिक निष्क्रिय होना या फिर बहुत अधिक सक्रिय होना

· अकेले रहना अधिक पसंद करते हैं, ऐसे में बच्चों के साथ ग्रुप में खेलना भी इन्हें पसंद नहीं होना

ऑटिज्म का निदान कैसे किया जा सकता है?
माता-पिता को सबसे पहले अपने बच्चे के अजीब व्यवहार का पता लग जाता है | शिक्षकों और परिवार के सदस्यों को भी बच्चे के अजीब व्यवहार का पता लग जाता है | कुछ संकेत 12-18 महीने की उम्र में मिल सकते हैं | उचित निदान के लिए , बच्चे को मनोचिकित्सक, बच्चों का चिकित्सक या मनोवैज्ञानिक की तरह, एक पेशेवर से विस्तृत मूल्यांकन कराना चाहिए ।
निदान का मूल्यांकन में शामिल हैं :-

· भाषा

· वाणी

· सोचने की क्षमता

· खेलने का व्यवहार की निगरानी

· दैनिक गतिविधियों में बच्चे के व्यवहार का मूल्यांकन

ऑटिज्म के लिए कोई विशेष मेडिकल परीक्षण नहीं है |कुछ अतिरिक्त परीक्षण जैसे कि IQ ka मूल्यांकन और अगर दौरे की तकलीफ है तो EEG की ज़रुरत भी पड़ सकती है | परीक्षण 2 साल की उम्र पर ही हो सकता है | लेकिन कुछ परीक्षण 18 महीने की उम्र पर हो सकते हैं |

ऑटिज्म के निदान के क्या फायदे हैं ?

· शीघ्र निदान मतलब शीघ्र बचाव

· यह विकार की गंभीरता को कम करने में मदद कर सकते हैं

· यह विकलांगता को रोकने में भी मदद कर सकते हैं

· बच्चे को जल्दी और बेहतर कामकाज में मदद मिल सकती हैं

· यह बच्चे को समाज का अखण्ड हिस्सा बनने में मदद कर सकता हैं |

क्या ऑटिज्म के साथ एक बच्चा सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता हैं ?

हाँ , अगर बच्चे को उस की तकलीफ के हिसाब से विभिन्न थेरेपी दी जाये जो उसकी क्षमता बढ़ाए | यह उसकी शक्तियों का उपयोग और सार्थक जीवन बिताने में मदद करेगी |

क्या ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे आम स्कूलों में पड़ सकते हैं ?

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे जिन की क्षमता ज्यादा हो , वे आम स्कूल में पढ़ सकते हैं | सामान्य स्कूल में जाने से बच्चे को सीखने के नए अवसर मिलते हैं | हालांकि, विशेष जरूरतों के लिए उचित आदानों की जरूरत है जैसे कि बिहेवियर थेरेपी, विशेष शिक्षा(स्पेशल एजुकेशन) आदि | जिन बच्चों में ऑटिज्म का प्रभाव जादा होता है उनका अधिक ध्यान रखने कि ज़रुरत पड़ती है और उन्हें स्पेशल स्कूल जाने की ज़रुरत पड़ती है |

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को कौनसी मेडिकल समस्याएं हो सकती हैं ?
ऑटिज्म के साथ एक बच्चे को हो सकता है :-

दौरे : दौरे की वजह से बच्चे के शरीर में कम्पन या झटके हो सकते हैं | बच्चा बेहोश भी हो सकते है या एकटक देखता हुआ नज़र आ सकते है | दिमाग का EEG टेस्ट कर के यह पता लगाया जा सकते है कि बच्चे को दौरे की परेशानी है और इसका इलाज करवाना ज़रूरी है |

चिंता और डिप्रेशन : ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में चिंता ,घबराहट एवं डिप्रेशन हो सकते है|

नींद : ऑटिज्म से प्रभवित बच्चों को नींद आने में , सोये रहने में एवं कई और तरह की नींद से सम्भंधित परेशानियां हो सकती हैं | अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर जैसी परेशानी भी हो सकती है |

पाचन शक्ति : ऑटिज्म के साथ बच्चों को अक्सर पाचन समस्याओं, पेट में दर्द, बार-बार दस्त या कब्ज हो सकता है | ऑटिज्म के साथ बच्चे को पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा हो सकता है , क्यूंकि वह खाना अपनी मर्ज़ी का ही पसंद करते हैं | कुछ बच्चों को कई तरह के खाने से एलर्जी हो सकती है |

ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों में तेज़ी होने कि वजह से ज़्यादा चोट लगने का खतरा रहता है | टिक डिसऑर्डर जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं |

या ऑटिज्म का इलाज है?

हाँ |ऑटिज्म के सभी लक्षणों को ठीक करने के लिए कोई एक दवा नहीं हैं | ऑटिज्म के उपचार के लिए एक पूर्ण मूल्यांकन कराना ज़रूरी हैं | ऑटिज्म के साथ एक बच्चे की समस्याएं दूसरे बच्चे की तुलना में अलग हो सकती हैं | इसलिए कोई भी चिकित्सा नहीं हैं जो ऑटिज्म के साथ हर बच्चे के साथ इस्तेमाल हो सकती हो | बच्चे की समस्याओं का एक सचेत समझ की जरूरत है। इन समस्याओं को समझने के बाद ,इन समस्याओं को हल करने के लिए एक प्रबंधन योजना की ज़रुरत हैं | एक पूर्ण, समग्र जांच की ज़रुरत हैं , इसलिए

· सपीच थेरेपी

· बिहेवियर थेरेपी

· औकूपएशनल थेरेपी

· विशेष शिक्षा(स्पेशल एजुकेशन)

· इलाज

हर बच्चे के ज़रुरत के हिसाब से बनाया जाता है | ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को मेडिकल समस्याएं हो सकती हैं जिसके लिए मेडिकल दवाओ से इलाज कराना ज़रूरी है |

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